दिल्ली :पश्चिम बंगाल में मतगणना की प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. चुनाव आयोग द्वारा केंद्रीय कर्मचारियों को ‘काउंटिंग सुपरवाइजर’ नियुक्त करने के फैसले के खिलाफ टीएमसी ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने इस मामले में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग को अपने अधिकारी चुनने का पूरा अधिकार है और वह उनके काम में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा सिब्बल ने चुनाव आयोग के नियमों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब पहले से ही माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में केंद्र सरकार का एक प्रतिनिधि मतगणना प्रक्रिया में मौजूद है, तो दूसरे प्रतिनिधि की काउंटिंग एजेंट के तौर पर क्या जरूरत है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मतगणना प्रक्रिया के दौरान सभी दलों के काउंटिंग एजेंट वहां मौजूद रहेंगे, जो एक सामान्य प्रक्रिया है। सुनवाई के दौरान एक बड़ा मुद्दा काउंटिंग सुपरवाइजर और एजेंटों की निष्पक्षता को लेकर उठा। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि काउंटिंग सुपरवाइजर और एजेंट केंद्र या राज्य सरकार के कर्मचारी हैं, तो उनकी नियुक्ति को गलत कैसे कहा जा सकता है? कोर्ट ने आगे कहा कि सरकारी कर्मचारी तो सरकारी कर्मचारी होते हैं—उनकी निष्ठा किसी एक राजनीतिक दल के प्रति कैसे हो सकती है