जालंधर:- मां बगलामुखी धाम गुलमोहर सिटी नज़दीक लमांपिंड चौंक जालंधर में मां बगलामुखी जी के निमित् सामुहिक निशुल्क दिव्य हवन यज्ञ का आयोजन मदिंर परिसर में किया गया।
सर्व प्रथम ब्राह्मणो द्वारा मुख्य यजमान नवप्रित सैनी से विधिवत वैदिक रिती अनुसार पंचोपचार पूजन, षोडशोपचार पूजन ,नवग्रह पूजन उपरांत सपरिवार हवन-यज्ञ में आहुतियां डलवाई गई।
सिद्ध माँ बगलामुखी धाम में आयोजित दिव्य हवन यज्ञ के दौरान पूरा परिसर वैदिक मंत्रों की पवित्र ध्वनि, यज्ञ की दिव्य अग्नि और माँ बगलामुखी की भक्ति से सराबोर नजर आया। श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ यज्ञ में आहुतियाँ अर्पित कर माँ के चरणों में अपनी आस्था समर्पित करते रहे।
इस अवसर पर धाम के प्रवक्ता नवजीत भारद्वाज ने उपस्थित श्रद्धालुओं को 108 मोतियों की माला के आध्यात्मिक रहस्य से अवगत कराते हुए कहा कि माला केवल उँगलियों से फेरने की वस्तु नहीं, बल्कि यह हमारे जीवन को दिशा देने वाला आध्यात्मिक प्रतीक है। यदि हाथ माला फेरते रहें और मन संसार की इच्छाओं में भटकता रहे, तो वह जप अधूरा रह जाता है। वास्तविक साधना तब प्रारंभ होती है, जब भगवान का नाम केवल होंठों पर नहीं, बल्कि हृदय की प्रत्येक धडक़न में बस जाए।
उन्होंने संत कबीरदास के प्रसिद्ध दोहे—
*‘‘माला तो कर में फिरै, जीभ फिरै मुख माँहि।*
*मनुआँ तो चहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं॥’’*
का उल्लेख करते हुए कहा कि जब तक मन प्रभु में स्थिर नहीं होता, तब तक जप का वास्तविक फल प्राप्त नहीं होता। यदि हमारी प्रत्येक साँस में ईश्वर का स्मरण, प्रत्येक कर्म में सेवा, प्रत्येक वचन में मधुरता और प्रत्येक विचार में करुणा समाहित हो जाए, तो हमारा संपूर्ण जीवन ही भगवान के नाम की एक दिव्य माला बन जाता है।
नवजीत भारद्वाज ने कहा कि संतों ने सदैव सिखाया है कि भगवान को हाथों से गिनी जाने वाली माला नहीं, बल्कि हृदय की निष्कलंक भावना प्रिय होती है। हाथों से माला फेरना सरल है, किंतु मन को भगवान के चरणों में स्थिर रखना ही सच्ची तपस्या है। जिस दिन भक्ति बाहरी प्रदर्शन से निकलकर अंतरात्मा में उतर जाएगी, उसी दिन ईश्वर का साक्षात अनुभव होने लगेगा।
उन्होंने कहा कि परमात्मा उसी हृदय में निवास करते हैं जहाँ अहंकार समाप्त हो चुका हो, जहाँ क्षमा का वास हो, जहाँ सेवा ही पूजा बन गई हो और जहाँ हर धडक़न प्रभु के नाम का स्मरण करती हो। ऐसा जीवन ही वास्तव में सफल और धन्य कहलाता है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने श्रद्धालुओं को जीवन की नश्वरता का स्मरण कराते हुए कहा कि एक दिन यह शरीर मिट्टी में मिल जाएगा। धन, वैभव, प्रतिष्ठा और रिश्ते सब यहीं रह जाएंगे। हमारे साथ केवल वही प्रभु का नाम जाएगा जिसे हमने सच्ची श्रद्धा से जपा होगा और वे सत्कर्म, जो हमने निस्वार्थ भाव से किए होंगे। उन्होंने सभी भक्तों से एक प्रेरणादायक संकल्प लेने का आग्रह किया कि केवल 108 मोतियों की माला गिनने तक सीमित न रहें, बल्कि अपने जीवन के 108 दोषों को दूर करने का भी प्रयास करें। क्रोध, अहंकार, ईर्ष्या, छल, लोभ और द्वेष जैसे विकारों को त्यागकर प्रेम, दया, क्षमा और सेवा के दीप अपने हृदय में प्रज्ज्वलित करें। जब जीवन का प्रत्येक क्षण प्रभु को समर्पित हो जाएगा, तब हमारा संपूर्ण जीवन स्वयं भगवान के चरणों में अर्पित एक अमूल्य माला बन जाएगा।
प्रवचनों के समापन पर नवजीत भारद्वाज ने भावुक शब्दों में कहा, ‘‘हाथों की माला एक दिन टूट सकती है, लेकिन हृदय की माला कभी नहीं टूटती। जिस हृदय में प्रभु का निवास हो जाता है, वहाँ भय, दुख और अकेलापन स्वत: समाप्त हो जाते हैं। वहाँ केवल शांति, प्रेम, भक्ति और परम आनंद का ही वास होता है।’’
इस अवसर पर समीर कपूर, विक्की अग्रवाल, अमरेंद्र कुमार शर्मा,सौरभ भाटिया,नरेश,कोमल, मुनीष मैहरा, ऋषभ कालिया,रिंकू सैनी, कमलजीत,बलजिंदर सिंह,बावा खन्ना, अमरजीत सिंह, उदय ,अजीत कुमार , नरेंद्र ,रोहित भाटिया,राकेश शर्मा,नवीन , प्रदीप, सुधीर, सुमीत,मनीष शर्मा, डॉ गुप्ता,अमनदीप,परमजीत सिंह, दानिश, रितु, कुमार,गौरी केतन शर्मा,सौरभ ,शंकर, संदीप,रिंकू,प्रदीप वर्मा, गोरव गोयल, मनी ,नरेश,अजय शर्मा,दीपक , किशोर,प्रदीप , प्रवीण,राजू,संजीव शर्मा, रोहित भाटिया,मुकेश, रजेश महाजन ,अमनदीप शर्मा, गुरप्रीत सिंह, विरेंद्र सिंह, अमन शर्मा, वरुण, नितिश,दीलीप, लवली, लक्की, मोहित , विशाल,रवि भल्ला,जगदीश, नवीन कुमार, निर्मल,अनिल,सागर,दीपक,प्रिंस कुमार,दीपक कुमार, नरेंद्र, सौरभ,दीपक कुमार, नरेश,दिक्षित, अनिल, कमल, अजय,बलदेव सहित भारी संख्या में भक्तजन मौजूद थे।
हवन यज्ञ उपरांत विशाल लंगर भंडारे का आयोजन किया गया।