लुधियाना, 1 जुलाई:

भाजपा पंजाब अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष एस. आर. लद्धड़, IAS (सेवानिवृत्त) ने कहा कि आज से देशभर में मनरेगा के नए डिजिटल प्लेटफॉर्म जी-राम (G-RAM) को लागू किया गया है.
पंजाब भी इस में शामिल है।
लेकिन सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि दिसंबर 2025 में पंजाब विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर इस व्यवस्था को गरीब विरोधी बताया था और इसका विरोध किया था।

श्री लद्धड़ ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से दो सीधे प्रश्न पूछे हैं:

1. यदि आज पंजाब सरकार जी-राम व्यवस्था लागू कर रही है, तो क्या सरकार अब यह मानती है कि यह गरीबों के हित में है? यदि हाँ, तो दिसंबर 2025 में इसे गरीब विरोधी बताने का आधार क्या था?
2. पंजाब विधानसभा द्वारा पारित उस प्रस्ताव का क्या हुआ? क्या सरकार ने उसे वापस लिया है या उसे पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है?

श्री लद्धड़ ने कहा कि यदि सरकार विधानसभा के पारित प्रस्ताव को निरस्त किए बिना उसके विपरीत कार्य कर रही है, तो यह पंजाब विधानसभा की गरिमा और अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय है। इस बात पर संवैधानिक और कानूनी दृष्टि से भी विचार होना चाहिए कि क्या यह विधानसभा के विशेषाधिकारों के उल्लंघन का मामला बनता है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब विधानसभा जैसी सर्वोच्च लोकतांत्रिक संस्था को गंभीर विमर्श का मंच बनाने के बजाय राजनीतिक नाटकीयता का माध्यम बना दिया है। आम आदमी पार्टी के भारी बहुमत और जवाबदेही की कमी के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं की गरिमा को गंभीर क्षति पहुँची है।
यह प्रश्न संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया से जुड़ा है। किसी विशेष कार्रवाई को “विशेषाधिकार हनन” मानने का अंतिम निर्णय संबंधित विधानसभा और उसकी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार ही होता है।